खादी और ग्राम उद्योग क्षेत्र में कार्यरत करीब पांच लाख कारीगरों में लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं हैं। सरकारी विवरण के अनुसार अगरबत्ती, हस्तनिर्मित कागज, शहद और सेवा उद्योगों में भी महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी है। खादी का विकेंद्रीकृत और श्रम-प्रधान उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग कौशल स्तर के रोजगार उपलब्ध कराता है।

अप्रैल 2025 से कताई और बुनाई की मजदूरी बढ़ाने, उपकरण तथा बुनियादी ढांचे में सहायता और विपणन समर्थन जैसे कदम लागू किए गए। एनआईएफटी के खादी उत्कृष्टता केंद्र ने 2,129 डिजाइन संग्रह तैयार किए हैं और 710 नए उत्पादों वाला ‘नवयुग खादी’ संग्रह शुरू किया गया। सरकारी योजनाओं में कार्यशील पूंजी, कच्चा माल, प्रशिक्षण, टूलकिट और सामाजिक सुरक्षा का सहयोग भी शामिल है।

प्राकृतिक रेशे और स्थानीय उत्पादन खादी की पर्यावरणीय पहचान का आधार हैं। आयोग प्राकृतिक रंगीन कपास विकसित करने के लिए कृषि अनुसंधान संस्थान के साथ काम कर रहा है, जिससे रंगाई में पानी, रसायन और ऊर्जा का उपयोग घटाने का लक्ष्य है। आय वृद्धि और पर्यावरण लाभ के दावे व्यापक स्वतंत्र आंकड़ों से परखे जाने चाहिए; आधिकारिक विवरण कार्यक्रमों की दिशा बताता है, पूरे क्षेत्र के समान परिणाम नहीं।