नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने राज्यों को डेटा सेंटर परियोजनाओं का मूल्यांकन करने के लिए नया ढांचा दिया है। 15 अक्टूबर की विज्ञप्ति के अनुसार इसे 14 अक्टूबर को जारी किया गया। इसका उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि यह देखना है कि प्रस्तावित स्थान पर बिजली, पानी, जमीन और संपर्क व्यवस्था लंबे समय तक परियोजना को सहारा दे सकती है या नहीं।

ढांचे में पांच प्रमुख क्षेत्र हैं: बिजली और ऊर्जा, पानी और शीतलन, स्थान और पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक तथा रणनीतिक मूल्य, और नीति व क्रियान्वयन। ग्रिड की तैयारी, नवीकरणीय ऊर्जा और भंडारण के उपयोग तथा नदी बेसिन के स्तर पर पानी के दबाव का आकलन करने की सिफारिश की गई है।

वर्षा जल संचयन, परिसर में जल उपचार, ई-कचरे और बैटरियों के निपटान की योजनाओं को भी महत्व दिया गया है। राज्यों के प्रोत्साहनों को मापे जा सकने वाले परिणामों से जोड़ने और मंजूरियों की जवाबदेही स्पष्ट करने की बात है। आयोग ने इसे निर्णय में मदद करने वाला साधन बताया है; यह किसी विशेष राज्य में नए डेटा सेंटर की मंजूरी की घोषणा नहीं है।