जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय भाषाओं पर गठित कार्यसमूह की पहली बैठक की है। भाषाविदों, विश्वविद्यालयों, प्रौद्योगिकी संस्थानों और समुदाय के भाषा कार्यकर्ताओं ने दस्तावेजीकरण, डिजिटल संरक्षण, शोध और शिक्षा के लिए साझा राष्ट्रीय दिशा पर विचार किया।

बैठक में आदि वाणी को अनुवाद उपकरण से आगे बढ़ाकर भाषा-संग्रह के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। आधिकारिक विवरण के अनुसार मंच नौ जनजातीय भाषाओं में पाठ अनुवाद, आवाज, ओसीआर और वीडियो उपशीर्षक की सुविधाएं देता है तथा 300 से अधिक प्राइमर खोजने योग्य रूप में उपलब्ध हैं।

राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थानों ने लगभग 13.9 लाख वाक्य और 300 घंटे का आवाज डेटा दिया है। कार्यसमूह से भाषा डेटा की विशेषज्ञ जांच, वर्तनी मानकीकरण, विषयवार शब्दावली और समुदाय आधारित डिजिटल अभिलेखों पर सहयोग मांगा गया; वक्ताओं ने समुदाय को संसाधनों का मालिक बनाए रखने पर भी जोर दिया।

भाषा संरक्षण केवल डेटा की मात्रा से नहीं मापा जा सकता। सहमति, समुदाय का नियंत्रण, बोलियों का सही प्रतिनिधित्व, बच्चों के लिए उपयोगी सामग्री, दीर्घकालीन अभिलेख सुरक्षा और वक्ताओं द्वारा स्वीकार्य अनुवाद जरूरी होंगे; छोटे समुदायों की भाषा को एक मानक रूप में जबरन सीमित नहीं किया जाना चाहिए।