महाअष्टमी पर त्रिपुरा के मंदिरों और दुर्गा पूजा पंडालों में सुबह से श्रद्धालु पहुंचते रहे। मंत्रोच्चार, पारंपरिक ढोल और पुष्प अर्पण के बीच राज्य के कई हिस्सों में धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए।

अगरतला के धलेश्वर रामकृष्ण मिशन में कुमारी पूजा की गई। यह अनुष्ठान बेलूर मठ में स्वामी विवेकानंद द्वारा 1901 में शुरू की गई दुर्गा पूजा परंपरा से जुड़ा है।

सिपाहीजाला जिले के सोनामुरा स्थित ऐतिहासिक दुर्गाबाड़ी मंदिर में भी रियासतकालीन रीति के अनुसार पूजा जारी है। इस साल मंदिर के वार्षिक दुर्गा उत्सव का 188वां संस्करण है। इस आयोजन में स्थानीय इतिहास और लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा दोनों एक साथ दिखाई देते हैं।