राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए व्यय पद्धति से सकल राज्य घरेलू उत्पाद के अनुमान तैयार करने के मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। मसौदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक समान ढांचा देने तथा अनुमानों की तुलनीयता बढ़ाने पर केंद्रित है।
दिशानिर्देशों में निजी और सरकारी अंतिम उपभोग व्यय, सकल स्थिर पूंजी निर्माण, माल-सूची में बदलाव, मूल्यवान वस्तुओं और शुद्ध निर्यात जैसे घटकों को शामिल किया गया है। मंत्रालय के मुताबिक कुछ राज्य अभी निवेश और सरकारी उपभोग के अनुमान बनाते हैं, लेकिन निजी उपभोग का राज्य-स्तरीय अनुमान फिलहाल तैयार नहीं किया जाता।
जहां सीधे राज्य-स्तरीय आंकड़े उपलब्ध हों, वहां उनके इस्तेमाल और अन्य मामलों में उपयुक्त आवंटन संकेतकों की सिफारिश की गई है। व्यय पद्धति का अनुमान उत्पादन या आय पक्ष से मिलने वाले जीएसडीपी आंकड़ों का पूरक होगा और अलग-अलग राज्यों की आर्थिक गतिविधि को दूसरे दृष्टिकोण से समझने में मदद कर सकता है।
यह अभी अंतिम पद्धति नहीं, सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए जारी मसौदा है। मंत्रालय ने दस्तावेज 28 अक्टूबर तक उपलब्ध रखने की बात कही है। अंतिम दिशानिर्देश और भविष्य के आंकड़े जारी होने से पहले मसौदे को किसी राज्य की वृद्धि, आय या खर्च का नया आधिकारिक अनुमान समझना उचित नहीं होगा।







