भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण 2026-27 के फील्ड सीजन में लगभग 500 खनिज खोज परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इनमें करीब 300 परियोजनाएं महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों पर केंद्रित हैं, जिनकी आपूर्ति स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जरूरी मानी जाती है।
कार्यक्रम में सतह के नीचे छिपे और गहरे भंडार खोजने के लिए भूवैज्ञानिक, भूभौतिकीय और भू-रासायनिक आंकड़ों को साथ उपयोग करने की योजना है। संस्था प्राकृतिक आपदा, हिमनद, भू-तकनीकी जांच, समुद्री खोज और भू-सूचना से जुड़े अध्ययन भी कर रही है।
भविष्य की रूपरेखा में पुराने ड्रिल-कोर का डिजिटल स्कैन, एआई और मशीन लर्निंग, 3डी तथा 4डी भूवैज्ञानिक मॉडल, देशव्यापी मैग्नेटोटेल्यूरिक सर्वे और भूमिगत महत्वपूर्ण-खनिज संभावना मानचित्र शामिल हैं। 58 भू-सूचना और डेटा विश्लेषण परियोजनाएं भी निर्धारित की गई हैं।
खोज परियोजना शुरू होना व्यावसायिक रूप से उपयोगी भंडार मिलने या खनन की मंजूरी मिलने के बराबर नहीं है। आगे संसाधन गुणवत्ता, पर्यावरणीय प्रभाव, स्थानीय सहमति, नीलामी प्रक्रिया, आर्थिक व्यवहार्यता और पुनर्वास की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।







