राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत युवाओं की संयुक्त स्वास्थ्य टीम यानी JOSH पहल शुरू की गई है। नई दिल्ली के राष्ट्रीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि युवा स्वयंसेवक समुदाय में टीबी के लक्षणों की जानकारी, समय पर जांच, उपचार से जुड़ाव और बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने में स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र की सहायता करेंगे।

मंत्रालय ने टीमों से केवल जागरूकता तक सीमित न रहकर सक्रिय केस खोज, निदान, उपचार शुरू कराने और उपचार पूरा होने तक सहयोग पर ध्यान देने को कहा है। आधिकारिक वक्तव्य में विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के आधार पर भारत में टीबी मामलों में 21 प्रतिशत कमी और उपचार कवरेज 92 प्रतिशत होने का उल्लेख किया गया, साथ ही प्रगति के बावजूद प्रयास तेज रखने की जरूरत बताई गई।

स्वयंसेवक चिकित्सक या प्रयोगशाला का विकल्प नहीं हैं और किसी व्यक्ति को लक्षण के आधार पर टीबी रोगी घोषित नहीं किया जाना चाहिए। जांच, निदान और दवा केवल राष्ट्रीय दिशानिर्देश तथा प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवर के माध्यम से हों। समुदाय कार्य में गोपनीयता, सूचित सहमति, भेदभाव से सुरक्षा और इलाज छोड़ने के कारणों—पोषण, दूरी, आय तथा दवा दुष्प्रभाव—पर व्यावहारिक सहायता जरूरी रहेगी।