पंजाब के 43 वर्षीय रघुबीर सिंह को 2025 में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की टर्म लोन योजना के तहत 2.50 लाख रुपये की सहायता मिली। आधिकारिक लाभार्थी विवरण के अनुसार उन्होंने इस राशि से आधुनिक मशीनें लगाकर अपने सिलाई और कढ़ाई के काम का विस्तार किया।
सहायता से पहले उनकी मासिक आय करीब 10 हजार रुपये बताई गई थी। कारोबार बढ़ने के बाद यह लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंची। रघुबीर सिंह नियमित किस्त चुकाने के साथ काम जारी रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मशीनों और अतिरिक्त कार्यक्षमता ने आय बढ़ाने तथा घरेलू जरूरतें अधिक स्थिरता से पूरी करने में मदद की।
यह आंकड़ा एक व्यक्ति के अनुभव पर आधारित सरकारी विवरण है, इसलिए इसे योजना के हर ऋणधारक के परिणाम के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। फिर भी मामला दिखाता है कि समय पर मिला अपेक्षाकृत छोटा कारोबारी ऋण मौजूदा कौशल-आधारित आजीविका में उपकरण जोड़ने और आय की क्षमता बढ़ाने में कैसे उपयोग किया जा सकता है।







