बेंगलुरु की पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज को एआई आधारित दवा अनुसंधान के लिए 86 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का समझौता हुआ है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की 12 अक्टूबर की सूचना के अनुसार, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड यह सहयोग अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष के तहत देगा। वीआईजीओआर परियोजना की कुल लागत 172 करोड़ रुपये है।
कार्यक्रम का लक्ष्य चार प्रायोगिक दवाओं को शुरुआती प्रौद्योगिकी स्तर से आगे ले जाना है। इसमें पूर्व-नैदानिक अध्ययन, वैज्ञानिक सत्यापन और नैदानिक परीक्षणों की तैयारी शामिल है। सहायता वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के जरिए दी जाएगी। घोषित कार्यक्रम में लगभग तीन वर्षों के विकास कार्य की परिकल्पना है।
एआई से किसी संभावित अणु की पहचान हो जाना उपचार की सफलता का प्रमाण नहीं होता। मंत्रालय ने भी प्रयोगात्मक जांच और स्थापित दवा विकास प्रक्रिया की जरूरत बताई है। ये प्रायोगिक उम्मीदवार हैं, मरीजों के उपयोग के लिए मंजूर नई दवाओं की घोषणा नहीं। इनके आधार पर अपना उपचार बदलना उचित नहीं है।







