खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 2025–26 में 1.87 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। पत्र सूचना कार्यालय के 13 अक्टूबर के पृष्ठभूमि विवरण में कहा गया है कि 2013–14 की तुलना में बिक्री 501 प्रतिशत बढ़ी, जबकि उत्पादन 380 प्रतिशत बढ़कर 1,25,296 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में इस क्षेत्र से जुड़ा रोजगार 56 प्रतिशत बढ़कर 2.04 करोड़ बताया गया है। ये आंकड़े मई 2026 तक उपलब्ध विवरण पर आधारित हैं।
रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के जट्टीमाजरा गांव की मोनो-कार्टन इकाई का उदाहरण भी दिया गया है। साहिल चौधरी की यह इकाई 25 लाख रुपये की परियोजना लागत से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत स्थापित हुई। आधिकारिक विवरण के अनुसार इसका वार्षिक कारोबार करीब 45 लाख रुपये है और यहां 23 लोगों को रोजगार मिला है।
कारीगरों के प्रशिक्षण में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। 2025–26 में KVIC के विभिन्न कार्यक्रमों में 79,682 लोगों ने प्रशिक्षण लिया, जिनमें 47,382 महिलाएं थीं—कुल प्रशिक्षुओं का लगभग 59 प्रतिशत। खादी क्षेत्र के करीब पांच लाख कारीगरों में महिलाओं की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक बताई गई है।
ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत 2025–26 में 37,769 मशीनें, टूलकिट और उपकरण वितरित किए गए। वहीं 2024–25 में संशोधित बाजार विकास सहायता के अंतर्गत 1,097 खादी संस्थानों को 245 करोड़ रुपये दिए गए, जिससे 1,45,484 कारीगरों को लाभ मिलने का दावा है। ये मंत्रालय द्वारा संकलित कार्यक्रम आंकड़े हैं; रिपोर्ट इन्हें स्वतंत्र प्रभाव-मूल्यांकन नहीं मानती।







