हिमालयी क्षेत्र में विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की जरूरत पर केंद्र सरकार ने जोर दिया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने श्रीनगर में 13वें ऑल इंडिया सस्टेनेबल माउंटेन डेवलपमेंट समिट के विशेष सत्र में कहा कि हिमालय झरनों, जल निकायों, नदी स्रोतों और ग्लेशियरों को सहारा देता है। इसलिए इसका संरक्षण केवल पर्वतीय राज्यों का विषय नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।

12 से 14 अक्टूबर तक आयोजित सम्मेलन का केंद्र सतत पर्वतीय विकास और जम्मू-कश्मीर की प्रस्तावित पर्वतीय विकास नीति है। आधिकारिक विवरण के अनुसार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की पहलों में हिमालयी पर्यावरण अनुसंधान, ग्लेशियरों की निगरानी, ग्लेशियोलॉजी प्रशिक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़ा शोध शामिल है। मंत्री ने अनधिकृत निर्माण और अनियंत्रित गतिविधियों से पैदा होने वाले दबाव का भी उल्लेख किया।

हिमालयी पारिस्थितिकी पर्यटन, कृषि और स्थानीय आजीविका से सीधे जुड़ी है। इसीलिए किसी भी परियोजना का मूल्यांकन केवल निर्माण या निवेश से नहीं, जलस्रोतों और स्थानीय समुदायों पर उसके प्रभाव से भी होना चाहिए। यह खबर सम्मेलन में दिए गए आधिकारिक वक्तव्य का सार है; किसी विशेष परियोजना के पर्यावरणीय अनुपालन पर स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं देती।