कुल्लू जिले के मलाणा गांव में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने नशा-रोधी जागरूकता और वैकल्पिक आजीविका पर जन संवाद आयोजित किया। 6 अक्टूबर के कार्यक्रम में ग्रामीणों और युवाओं से अवैध भांग की खेती के सामाजिक तथा पर्यावरणीय प्रभावों पर बातचीत हुई। पहल को युवा रक्षा कार्यक्रम और राष्ट्रीय मादक पदार्थ नीति के निवारक उद्देश्यों से जोड़ा गया है।
ग्रामीणों ने वैकल्पिक आजीविका अपनाने में संपर्क, बाजार तक पहुंच, कृषि उत्पादों के उचित मूल्य और सेब की खेती से जुड़ी कठिनाइयां बताईं। चर्चा में मधुमक्खी पालन, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और पर्यटन जैसे स्थानीय विकल्प शामिल रहे। अवैध खेती से चरागाहों में कमी, वनों की कटाई और स्थानीय पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी उठाया गया।
कार्यक्रम के अंत में समुदाय के सदस्यों ने मादक पदार्थों से दूर रहने और अगले कृषि मौसम में अवैध भांग की खेती को हतोत्साहित करने का संकल्प लिया। यह संकल्प किसी कानूनी मामले के निपटारे या पूरे क्षेत्र में खेती समाप्त होने का प्रमाण नहीं है। वैकल्पिक आजीविका की सफलता के लिए प्रशिक्षण के साथ बाजार, परिवहन और उचित मूल्य की व्यावहारिक व्यवस्था जरूरी होगी।







