दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण घटाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने 17 अक्टूबर को स्टार्टअप और नवाचार कंपनियों के साथ बैठक की। आधिकारिक सूचना के अनुसार बातचीत का केंद्र ऐसे व्यावहारिक, किफायती और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधान थे, जो प्रदूषण के स्रोत पर मापने योग्य असर दिखा सकें। बैठक में केंद्र और दिल्ली सरकार के विभागों के साथ सीएक्यूएम, सीपीसीबी और डीपीसीसी के अधिकारी भी शामिल हुए।
चर्चा में प्रदूषण प्रबंधन से जुड़ी नौ चुनौतियां रखी गईं। इनमें औद्योगिक उत्सर्जन निगरानी प्रणालियों को छेड़छाड़ से बचाना, संयंत्र संचालन के आंकड़ों से उत्सर्जन डेटा मिलाना, निर्माण स्थलों और सड़क की धूल का पता लगाना तथा डीजल जेनरेटर के नियंत्रण उपकरणों की निगरानी शामिल है। कम लागत वाली यांत्रिक सड़क सफाई, गड्ढों की पोर्टेबल मरम्मत और मॉड्यूलर धूल नियंत्रण प्रणालियों पर भी विचार हुआ।
मंत्रालय ने शहर-स्तरीय वायु गुणवत्ता निगरानी, साफ वाहनों और बेहतर यातायात प्रबंधन में तकनीक की भूमिका रेखांकित की। बैठक में एआई से ट्रैफिक जाम के संभावित स्थान पहचानने, पीयूसी जांच को अधिक विश्वसनीय बनाने और पराली, ठोस कचरे तथा निर्माण मलबे के वैज्ञानिक प्रबंधन के सुझाव आए। ये विचार अभी संवाद और संभावित समाधान के स्तर पर हैं; विज्ञप्ति किसी एक तकनीक की खरीद या पूरे क्षेत्र में तत्काल लागू होने की घोषणा नहीं करती।







