जल शक्ति मंत्रालय ने नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण की प्रगति से जुड़े आंकड़े जारी किए हैं। 2025 के निरीक्षण चक्र में गंगा बेसिन के 1,296 और यमुना बेसिन के 2,407 अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों सहित कुल 3,703 इकाइयों का आकलन किया गया। यह अभ्यास छह राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के 113 जिलों तक फैला था।

मंत्रालय के अनुसार गंगा बेसिन में उद्योगों का अनुपालन 2017 के 39 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 86 प्रतिशत हुआ। इसी अवधि में जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग यानी बीओडी भार 26 टन प्रतिदिन से घटकर 7.16 टन प्रतिदिन और अपशिष्ट जल निर्वहन 349 एमएलडी से घटकर 274.88 एमएलडी हुआ। ये आंकड़े सरकारी निरीक्षण और नियामक रिपोर्टिंग पर आधारित हैं।

निरीक्षण में अपशिष्ट उपचार संयंत्रों से नमूने, प्रवाह, पीएच, बीओडी, सीओडी और अन्य मानकों की जांच के साथ ऑनलाइन निरंतर निगरानी प्रणाली की कनेक्टिविटी भी देखी जाती है। 2025 में 25 तकनीकी संस्थान निरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े थे, जबकि 2026 के चक्र के लिए 40 संस्थान नामित किए गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि 3,145 चालू उद्योगों में 2,715 अनुपालन में और 448 गैर-अनुपालन में पाए गए। सरकारी आंकड़े सुधार का रुझान बताते हैं, लेकिन नदी के अलग-अलग हिस्सों में वास्तविक जल गुणवत्ता, मौसमी बदलाव और स्वतंत्र दीर्घकालीन परीक्षणों को साथ रखकर ही व्यापक निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।