भारत और जापान के वन सहयोग संयुक्त कार्य समूह की सातवीं बैठक आठ सितंबर को बेंगलुरु में हुई। दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने 2015 में हुए सहयोग ज्ञापन के तहत 2027 से 2031 के रोडमैप को समर्थन दिया। आधिकारिक विवरण के मुताबिक आगे का सहयोग वन, जैव विविधता संरक्षण, अनुसंधान और क्षमता विकास पर केंद्रित रहेगा।

बैठक में वनों के बाहर उगने वाले पेड़ों के संसाधनों का आकलन, प्रबंधन और आनुवंशिक सुधार पहला प्रमुख विषय था। दूसरा विषय वन आनुवंशिकी रहा, जिसमें आनुवंशिक संसाधन संरक्षण, वृक्ष प्रजनन, बेहतर रोपण सामग्री और जीवित आनुवंशिक सामग्री के संरक्षण पर विचार हुआ। ये क्षेत्र लकड़ी की मांग, ग्रामीण आय और पारिस्थितिक विविधता के बीच संतुलन से जुड़े हैं।

तीसरे हिस्से में वन सूची, वन भंडार आकलन और भू-स्थानिक व निगरानी तकनीकों पर अनुभव साझा किया गया। दोनों देशों के दल ने बेंगलुरु के लकड़ी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान का दौरा भी किया। कार्यक्रम में मैसूरु के चंदन कृषि-वानिकी फार्म, प्रसंस्करण इकाई और नागरहोल क्षेत्र की यात्रा शामिल थी, ताकि निजी खेती और संरक्षण पद्धतियों को देखा जा सके।

बैठक का कार्यवृत्त और रोडमैप सहयोग की दिशा बताते हैं, लेकिन इन्हें वन क्षेत्र में मापे हुए परिणाम नहीं माना जा सकता। आगे प्रगति का आकलन साझा शोध, प्रशिक्षण की संख्या, खुले डेटा, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और जैव विविधता पर वास्तविक प्रभाव से होना चाहिए। चंदन या अन्य वाणिज्यिक प्रजातियों के विस्तार में स्थानीय पारिस्थितिकी और प्राकृतिक वन संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक रहेगा।